कबड्डी के खेल के बारे में पूरी जानकारी (हिंदी में)

कबड्डी खेल भारत में बहुत प्रचलित है और इसके पीछे का कारन भी यही है की कबड्डी की शुरुआत भारत से ही मानी जाती है। इस खेल के बारे में ये फैक्ट है की कबड्डी भारत के लगभग हर राज्य में जाना जाता है। और साथ में इस खेल के बारे में लगभग सही को कुछ न कुछ तो जानकारी होती ही है। तो आज हम कबड्डी के बारे में बात करने वाले है की आखिर भारत और कबड्डी का क्या क्या सम्बन्ध है और कब से इसकी शुरुआत हुई थी।

कबड्डी का भारत में इतिहास

जैसे की हमने अभी बात करि थी की कबड्डी की शुरुआत भारत से ही मानी जाती है तो ये भारत में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। कबड्डी के बारी में हमे पुराने ग्रंथो में भी जानकारी मिलती है जैसे की महाभारत के समय में भी कबड्डी खेली जाती थी लेकिन उस समय इसका नाम कबड्डी न होकर एक श्वास था मतलब की ऐसा खेल जो की एक तरफ की श्वास से खेला जाता था। अभी के समय में भी कबड्डी को भारत के अलग अलग राज्यों में अलग अलग नाम से जाना जाता है जैसे की बंगाल व बिहार में इसे ‘हु डु डु’ नाम से जाना जाता है और बात करे मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र में तो वहा पर इस खेल को ‘हु तु तु’ तमिलनाडु व कर्नाटक में ‘चडुगुडु’ के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार भारत में भी कबड्डी के बहुत सारे नाम प्रचलित है।

कबड्डी के बारे में हमे सबसे पहली जानकारी महाभारत ग्रन्थ से मिलती है जिसमे कब्बड्डी के बारे में जिक्र किया गया था। और उसके बाद से ही भारत में कबड्डी खेली जा रही है।

आधुनिक कबड्डी

आधुनिक कबड्डी के बारे में बात करे तो अभी के समय में कब्बड्डी में बहुत सारे नियम लागु कर दिए गए है जबकि पुराने समय में इसके नियम कुछ अलग थे। आधुनिक कबड्डी अभी के नियमो पर आधारित है और आधुनिक कबड्डी के नियमो को लागु करने के लिए 1923 में दक्कन जिमखाना ने कबड्डी के नियमो पर एक पुस्तक प्रकाशित करि थी। और बाद में इस पुस्तक को 1934 पुनः प्रकाशित किया गया था। जिसमे अखिल महाराष्ट्र शारीरिक परिषद ने कबड्डी के पुराने नियमो में कुछ संसोधन किये थे और आधुनिक कबड्डी के नियमो को लागु किया था।

कबड्डी को अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति।

आधुनिक कबड्डी के नियम लागु होने के कुछ समय बाद से ही कबड्डी को इंटरनेशनल ख्याति मिलने लगी थी। 1938 में कबड्डी को भारत के राष्ट्रीय खेलो में शामिल कर लिया गया था और उसी वर्ष बर्लिन ओलंपिक खेलों में भी भारत की तरफ से कबड्डी का प्रदर्सन किया गया था। हलाकि इस खेल को राष्ट्रीय खेलो में शामिल कर लिया गया था,

लेकिन फिर भी इस खेल को राष्ट्रीय खेल की मान्यता 1951 में मिली थी। क्युकी इस समय कबड्डी के लिए अलग से एक संगठन बनाया गया था जिसका नाम राष्ट्रीय कबड्डी संघ रखा गया। इसके बाद में 1957 में रूस के मास्को शहर में विश्व युवा समारोह में भी कबड्डी का प्रदर्शन किया गया था जिससे कबड्डी को इंटरनेशनल ख्याति मिली थी।

हालाँकि कबड्डी को ओलिंपिक में शामिल नहीं किया गया है लेकिन फिर भी कबड्डी को एशियन गेम्स में शामिल कर लिया गया है जिसकी वजह से को अभी तक एशियन गेम्स में अच्छी खासी पहचान मिली हुई है।

कबड्डी के कुछ सामान्य नियम

कबड्डी जो की भारत में बहुत ज्यादा खेला जाने वाला खेल है। इस खेल की जन्म स्थली भारत ही है इस्सलिये इसके नियम भी ज्यादातर भारत में ही बनाये गए है। एक बार कब्बड्डी में खेले जाने वाले खिलाड़ियों के साथ साथ उसमे लागु होने वाले नियमो के बारे में भी जान लेते है। बाकि खेलो की भाति इस खेल में भी कुछ ऐसे नियम है जो की केवल कबड्डी में ही लागु होते है। और अगर बात करे इन नियमो की तो वो कुछ इस प्रकार है।

  • खेलने वाले प्लेयर के नाख़ून ज्यादा बड़े नहीं होने चाहिए।
  • कबड्डी की एक टीम में ज्यादा से ज्यादा 12 खिलाडी ही हो सकते है जिनमे से 7 खिलाडी खेलने वाले होते है और बाकि 5 खिलाडी एक्स्ट्रा खिलाडी के तोर पर रखे जाते है।
  • किसी भी प्लेयर को तेल या कोई और मुलायम पदार्थ शरीर पर लगाने की अनुमति नहीं होती है।
  • कबड्डी ग्राउंड की बोनस लाइन तब लागू नहीं होगी जब खिलाड़ियों की संख्या 5 या 5 से कम हो।
  • ज्यादा से ज्यादा 5 प्लेयर को ही replace किया जा सकता है। और जिस खिलाडी को एक बार replace कर दिया जाता है उसको दुबारा नहीं किया जाता है।
  • अगर किसी टीम में एक या दो खिलाडी उपस्थित नहीं हो फिर भी मैच चालू किया जा सकता है लेकिन अगर उसके बाकि खिलाडी आउट होने पर बचे हुए दो खिलाड़ियों की भी आउट ही माना जाता है।
  • सभी खिलाडी उसी क्रम में वापस revive होते है जिस क्रम में वो आउट हुए थे।

कबड्डी के ग्राउंड की जानकारी।
कबड्डी का ग्राउंड अगर गावो में खेला जाता है तो ज्यादातर ग्राउंड बिना किसी नाप के ही बना दिए जाते है लेकिन जब कबड्डी का कोई ऐसा मैच होता है जो की नेशनल लेवल का होता है या फिर किसी किसी स्कूल में कबड्डी का ग्राउंड बनाया जाता है तो फिर उसमे एक फिक्स नाप से ही ग्राउंड को तैयार किया जाता है।
कबड्डी के मैदान की माप
पुरुषों या सीनियर (बड़े लोगो के लिए ) के लिए 13 मी० लम्बाई और 10 मी०चौड़ाई
महिलाओं और जूनियर्स के लिए 12 मी० लम्बाई व 8 मी० चौड़ाई
छोटे बच्चो के लये कबड्डी ग्राउंड का नाप लड़के और लड़कियों के लिए 10 मी० लम्बाई व 8 मी० चौड़ाई।

कबड्डी लॉबी

कबड्डी की लॉबी की बात करे तो ऐसी जगह जहा पर खेलने वालो के अलावा दूसरे प्लेयर बैठते है।
कबड्डी लॉबी की चौड़ाई – 1 मी०

कबड्डी में लिए जाने वाले कुछ मुख्य प्रकार के नियम।

  • प्रत्येक टीम के खिलाड़ियों की संख्या -12
  • मैच में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या – 7
  • पुरुषों के मैच का समय – 20-20 मिनट
  • महिलाओं तथा जूनियर्स के मैच का समय- 15-15 मिनट के दो अर्ध (Half)
  • इंटरवेल का समय – 5 मिनट
  • रेफरी की संख्या – 1
  • अम्पायर की संख्या – 2
  • स्कोरर्स की संख्या – 1
  • लाइन मेन की संख्या – 2

कबड्डी के कुछ फंडामेंटल स्किल्स।

कबड्डी के लिए कुछ ऐसे स्किल या फिर कुछ ऐसे नियम बोल सकते है जो की कबड्डी खेलते समय ध्यान रखने होते है। वो नियम सभी जगह लागु होते है। कबड्डी के कुछ नियम इस प्रकार है।

कबड्डी के आधुनिक रूप में कुछ ऐसे नियम लागु किये गए है जो की पुराने समय में लागु नहीं होते थे।
आधुनिक समय में कबड्डी भी एक इंटरनेशनल खेल के रूप में जाना जाता है इसलिए इस खेल के कुछ नियम इंटरनेशनल खेल के हिसाब से भी बनाये गए है।

  • रेडर जब भी रेड देने जाता है तो उसको लगातार कबड्डी शब्द का उच्चारण करना जरुरी है।
  • म्यूल किक (Mule Kick) का उपयोग भी कर सकते है। म्यूल किक (Mule Kick) वो होती है जिसमे रेडर वापस जाते समय गधे की तरह आपने पैर से पीछे मारता है।
  • एरो किक (Aero Kick) – ये किक सबसे ज्यादा स्पीड से लगाई जाती है क्युकी इसमें केवल हवा में रहकर ही किक मारनी होती है।
  • टो टंच (Toe Touch) – टो टंच (Toe Touch) ऐसे प्लेयर के लिए बेस्ट होती है जो की आपने दोनों पेरो को पूरा खोल सकते है क्युकी इसमें दोनों पेरो को खोला जाता है और शरीर का सारा भार दोनो पेरो पर आ जाता है। इस प्रकार की रेड को टो टंच (Toe Touch) रेड कहा जाता है इसके अलग से पॉइंट मिलते है।
  • Ankle catch – जैसे की नाम से ही पता चल रहा है की Ankle catch में रेडर के टखने को पकड़ना होता है। ताकि रेडर को वही के वही रोका जा सके। जब रेडर आपने पैर से किक देने की कोशिश करता है तो उस समय ये ट्रिक काम आती है। इसमें आप सामने वाले प्लेयर के टखने को पकड़ सकते हो और फिर अंगुलियों को इंटरलॉक कर के प्लेयर को रोक सकते हो।

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